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    आप ही हमारे पापा हैं, भटकी हुई नाबालिग का सहारा बने

    बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :-नावानगर, रमजान के महीना में बरसती है खुदा की रहमत। भूखे को खाना, प्यासे को पानी और भटके हुए को राह दिखाना ही खुदा का इबादत है। अपनों से  साथ बिछड़कर औरों की आंखों में मम्मी और पापा का स्नेह तलाश रही नन्ही सी मुरत 5 वर्षीय तैईवा खातून को भला क्या पता था कि भोजपुर से चलकर नासरीगंज गोडारी जाने के क्रम में रास्ता भटक जाऊंगी। और रास्ते में दूसरे पापा मिलकर हमें दूध भात खिलाएंगे। खैर जिसका कोई नहीं उसका खुदा है यारों,लोग यही कहते हैं कि आप दूसरे के बच्चों को स्नेह पूर्वक दूध भात खिलाएंगे तो आपके बच्चे को भी खिलाने वाला कोई ना कोई मह अफातरा में  सहारा बनने के लिए मालिक भेज ही  देते हैं। खैर आप जैसा कर्म करेंगे वैसा आपके बाल बच्चा के सामने आएगा। कर भला तो हो भला। जिसे सच साबित कर  दिखाया
    वरिष्ठ समाजसेवी क्रेशन ज्योति सेवा संस्थान सेवई टोला अनाथालय के सचिव रामराज ने भटकी हुई बच्ची नया भोजपुर के जुबेर कुरैशी की 5 वर्षीय पुत्री तैईवा खातून घर में बाहर से ताला बंद करके अपनी बहन नासरीगंज गोडारी में रहने वाली रूबी खातून कि यहां जाने के लिए निकल पड़ी । बीच रास्ते में भटकी हुई बच्ची से समाजसेवी रामराज सिंह से मुलाकात हुई, जिसकी सूचना नावानगर थाने में देकर अपने संस्था में सोमवार को रात्रि 10:00 बजे लाए। पूछताछ में घर से बिछुड़ी हुई नाबालिक बच्ची अपना पता कभी नया भोजपुर तो कभी नासरीगंज बता रही थी , घर से गायब हुई बच्ची के गार्जियन परेशान ना हो इसलिए बच्ची की बताए हुए संभावित ठिकानों से संपर्क  किया गया ।लेकिन कोई गार्जियन नहीं मिल पाए। फिलहाल संस्था  परिवार के साथ बच्ची घुल मिलकर रह रही है कोई परेशानी नहीं ।अगर सही गार्जियन आए तो उन्हें जांचोउपरांत बच्ची के कहने पर सौंप दिया जाएगा। फिलहाल गार्जियन घबराए नहीं इसकी जानकारी अखबार और सूचना तंत्र के माध्यम से करने का प्रयास किया ही जा रहा था , की गार्जियन नावानगर थाना के सहयोग से संस्था से संपर्क किया। जिसे संस्था सचिव रामराज सिंह , वार्डन ज्योति कुमारी और थाना प्रभारी जुनैद आलम के उपस्थिति में कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद सही सलामत गार्जियन को सौंप दिया गया ।

    क्या कहते हैं संस्था सचिव
    मेरा सामाजिक संस्था का रजिस्ट्रेशन किसी खास आदमी के यहां नहीं सीधे खुदा के यहां हुआ है। जो मदर टेरेसा का दूसरा रूप हैं। औरों से चंदा मांग कर चल रही संस्था को किसी तरह का सरकारी सहयोग नहीं है। फिर भी पीड़ित मानवता और दीन दुखियों के सेवा अनवरत जारी रहता है। यही सकून की जननी है। पिछले दिनों रोड एक्सीडेंट में बुरी तरह से घायल को संस्था के द्वारा अस्पताल में भर्ती कराकर नया जीवनदान मिला था।
    https://drive.google.com/file/d/1R8rvtPijg0C4duKxbK6hUoCoqtU3ZuQ5/view