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    छात्रों को सफल-असफल होने का भय क्यों

    बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :- इसी महीना यानी फरवरी से शुरू होने वाली है मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा। हर वर्ष देश भर में करीब-करीब सभी मान्यता प्राप्त बोर्ड मैट्रिक और इंटरमीडिएट के छात्रों का परीक्षा लेते है। ज्यादातर परीक्षाएं नव वर्ष के शुरुआती  महीनों में ही लिया जाता है। जैसे जैसे जनवरी महीना खत्म हो रहा,छात्रों में अपनी परीक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ रही थी। प्रत्येक वो बच्चे जिनकी इस वर्ष मैट्रिक या फिर इंटरमीडिएट के अंतिम परीक्षा होने वाली है उनके चेहरे पर तनाव साफतौर पर देखा जा सकता है, ये कोई नयी बात नही है और ऐसा हर किसी के साथ हुआ रहता है चाहे वो व्यक्ति आज कितना भी बड़ा आदमी क्यो न हो।

    मैट्रिक की परीक्षा छात्र जीवन की पहली नदी होती है जिसको पार करना हर छात्र अति आवश्यक समझते हैं और होना भी चाहिए क्योंकि मैट्रिक के परीक्षा के बाद ही छात्र अपने करियर बनाने के लिए उचित विकल्प की चयन करते है जिनको जिस क्षेत्र में रुचि रहती है वे उस विषय को अपना विकल्प के रूप में चुनते है और उसी विषय पर कड़ी मेहनत कर के अपने अच्छे करियर की ओर अपना कदम बढ़ाना शुरू करते है। मैट्रिक के बाद ही छात्र चुने हुए अपने मनपसन्द विषयानुसार पढ़ाई करते है,
    कोई विज्ञान को अपना विषय बनाते है तो कोई वाणिज्य या फिर कला को।
    इन सभी विषयो की चुनाव मैट्रिक की परीक्षा को छात्रों द्वारा सफलता पूर्वक निकाल लेने के बाद ही सम्भव होता है।
    उपयुक्त सभी बातो को ध्यान में रख कर छात्र अपने परीक्षा को लेकर बहुत ही तनाव में आ जाते है। उनको अपनी परीक्षा परिणाम का भय होने लगते है की कही उनका अंक कम आ गया तो क्या होगा,इम्तिहान में कैसा प्रश्न पूछे जाएंगे,क्या उन पूछे गये प्रश्नों के सही उत्तर हम दे पायेंगे या नही। इन सभी बातो का ख्याल छात्रों के मन में दिन रात आता रहता है जिससे उनके अपना आत्मविश्वास डगमगाने लगता है और पढ़े हुए चीजे भूलने लगते हैं। इसके बावुजूद कितने लोग यैसे होते है जो छात्रों के ऊपर अपना कई तरह के दबाव बनाने लगते है
    जैसे की परीक्षा में अधिक अंक किसी भी हालत में लाना है,अपनी आशाओ पर 100 फीसदी खरे उतरने का दबाव,दूसरे की बच्चो के साथ तुलना करके उनको बहुत ज्यादा तनाव में डाल देते है जबकी ऐसा बच्चो के साथ नही करना चाहिए क्योकि एक तो पहले से ही खुद बच्चे अपने परीक्षा को लेकर परेशान रहते है , परीक्षा के दिन नजदीक आने से अंदर ही अंदर उनकी मन में कई प्रकार की भावनाएं पैदा होती रहती है जिससे वे अपने अध्ययन करते वक्त मन को एकाग्रचित नही कर पाते।

    छात्रों को अपने खुद पर विश्वास रखना चाहिए और परीक्षा परिणाम से भयभीत न होकर लग्न और मेहनत से परीक्षा की तैयारी में लगे रहना चाहिए। कितने बच्चे तो मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा को ही अपनी जीवन की अंतिम परीक्षा मान बैठते है और परिणाम उनके अनुकूल न आने पर उल्टा सीधा कदम उठा लेते है।

    जबकि छात्रों को ये बात समझने की जरूरत है की उनकी जीवनी इसी मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा परिणाम से नही लिखी जाएंगी। अभी तो पूरा जीवन परीक्षाओ से भरा पड़ा है और छात्रों को इसी प्रथम परीक्षा की सफलता और असफलता को जीवन की हार और जीत मान लेना मूर्खता का प्रतीक होगा। दुनिया में उदाहरण के लिए ऐसे बहुत से महान बने व्यक्ति मिल जाएंगे जो अपनी मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में अच्छे  मूल्यांक न पाते हुए भी जिन्दगी में आज ओ मुकाम हासिल किये है जो हर किसी की वस की बात नही है।

    इसलिए छात्रों को अपना मेहनत अपना कर्म निरन्तर करते रहना चाहिए और परीक्षा के परिणाम से बिचलित नही होना चाहिए। जिंदिगी है तो चुनौतियां मिलती ही रहेंगी और इन्ही चुनौतियों को डट कर जो सामना करता है वो एक न एक दिन जीवन में अवश्य सफल होता है।
    गुलसन सिंह
    https://drive.google.com/file/d/1R8rvtPijg0C4duKxbK6hUoCoqtU3ZuQ5/view