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    युवा सप्ताह में कार्यकर्ताओं ने शहीद पार्क में चलाया स्वच्छता अभियान

    बक्सर अप टू डेट न्यूज़ :-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद डुमराँव के कार्यकर्ताओं द्वारा स्वामी विवेकानंद युवा सप्ताह अंतर्गत स्थानीय शहीद स्मारक पार्क में स्वछता अभियान चलाया गया एवं दीपोत्सव के साथ पुष्पांजलि कार्यक्रम किया गया
    कार्यक्रम का नेतृत्व प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संटू मित्रा ने किया
    कार्यक्रम के उपरांत एक सभा का आयोजन किया गया जिसका शुरुआत परिषद गीत से किया गया
    कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए विभाग संयोजक दीपक यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने राष्ट्र को गौरवशाली बनाने का सपना संजोया था राष्ट्र के जीवन में नवीन प्राणों का संचार करने वाले स्वामी विवेकानंद का जीवन जितना रोमांचकारी है उतना ही प्रेरणादायक भी। उन्होंने अपने विचारों से अतीत के अधिष्ठान पर वर्तमान का और वर्तमान के अधिष्ठान पर भविष्य का बीजारोपण कर देश की आत्मा को चैतन्यता से भर दिया। स्वामी जी का उदय ऐसे समय में हुआ जिस समय भारत के सामाजिक पुनरुत्थान के लिए राजाराम मोहन राय और शिक्षा के विकास के लिए ईश्वरचंद विद्यासागर जैसे अनगिनत मनीषी भारतीय समाज में नवचेतना का संचार कर रहे थे। स्वामी जी अपने विचारों के जरिए स्वधर्म और स्वदेश के लिए अप्रतिम प्रेम और स्वाभिमान का उर्जा प्रवाहित कर जाग्रत-शक्ति का संचार किया जिससे भारतीय जन के मन में अपनी ज्ञान, परंपरा, संस्कृति और विरासत का गर्वपूर्ण बोध हुआ। स्वामी जी की दृष्टि में समाज की बुनियादी इकाई मनुष्य था और उसके उत्थान के बिना वे देश व समाज के उत्थान को अधूरा मानते थे। उनका दृष्टिकोण था कि राष्ट्र का वास्तविक पुनरुद्धार मनुष्य-निर्माण से प्रारंभ होना चाहिए। मनुष्य में शक्ति का संचार होना चाहिए जिससे कि वह मानवीय दुर्बलताओं पर विजय प्राप्त करने में और प्रेम, आत्मसंयम, त्याग, सेवा एवं चरित्र के अपने सद्गुणों के जरिए उठ खड़ा होने का सामथ्र्य जुटा सके। वे सर्वसाधारण जनता की उपेक्षा को एक बड़ा राष्ट्रीय पाप मानते थे। 1893 में शिकागो में धर्म सम्मेलन (पार्लियामेंट आफॅ रिलीजन ) के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि ‘मेरी यह धारणा वेदान्त के इस सत्य पर आधारित है कि विश्व की आत्मा एक और सर्वव्यापी है। पहले रोटी और फिर धर्म। लाखों लोग भूखों मर रहे हैं और हम उनके मस्तिष्क में धर्म ठूंस रहे हैं। मैं ऐसे धर्म और ईश्वर में विश्वास नहीं करता, जो अनाथों के मुंह में एक रोटी का टुकड़ा भी नहीं रख सकता।’ उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित अमेरिका और यूरोप के धर्म विचारकों व प्रचारकों को झकझोरते हुए कहा कि ‘भारत की पहली आवश्यकता धर्म नहीं है। वहां इस गिरी हुई हालत में भी धर्म मौजूद हैं। भारत की सच्ची बीमारी भूख है। अगर आप भारत के हितैशी हैं तो उसके लिए धर्म प्रचारक नहीं अन्न भेजिए।’ स्वामी जी गरीबी को सारे अनर्थों की जड़ मानते थे। इसलिए उन्होंने दुनिया को सामाजिक-आर्थिक न्याय और समता-समरसता पर आधारित समाज गढ़ने का संदेश दिया। वे ईश्वर-भक्ति और धर्म-साधना से भी बड़ा काम गरीबों की गरीबी दूर करने को मानते थे। एक पत्र में उन्होंने ने लिखा है कि ‘ईश्वर को कहां ढुंढ़ने चले हो। ये सब गरीब, दुखी और दुर्बल मनुष्य क्या ईश्वर नहीं है? इन्हीं की पूजा पहले क्यों नहीं करते ?’ उन्होंने स्पष्ट घोषणा की थी कि ‘गरीब मेरे मित्र हैं। मैं गरीबों से प्रीती करता हूं। मैं दरिद्रता को आदरपूर्वक अपनाता हूं। गरीबों का उपकार करना ही दया है।’ वे इस बात पर बल देते थे कि हमें भारत को उठाना होगा, गरीबों को भोजन देना होगा और शिक्षा का विस्तार करना होगा। स्वामी जी ने भारत के लोगों को संबोधित करते हुए शिकागो से एक पत्र में लिखा कि याद रखो की देश झोपड़ियों में बसा हुआ है, परंतु शोक! उन लोगों के लिए कभी किसी ने कुछ नहीं किया।’ स्वामी जी गरीबों को लेकर बेहद संवेदनशील थे सच मे यदि भारत को जानना है तो स्वामी विवेकानंद को पढ़ना होगा,
    कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर मंत्री लक्ष्मण राम ने किया एवं संचालक कार्यालय मंत्री अमृतांशु भगत ने किया कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम गीत के साथ किया गया मौके पर कालेज अध्यक्ष प्रिंस दुबे प्रखंड इकाई कार्य प्रमुख अभिषेक पाठक सा मंत्री बाबूलाल राम रोशन कुमार मनीष कुमार बलेश्वर अभिषेक चौरसिया प्रिंस गुपुत अंकित रोहित शक्तिमान मुकेश विकास दीपक समेत कई लोग मौजूद रहे|
    https://drive.google.com/file/d/1R8rvtPijg0C4duKxbK6hUoCoqtU3ZuQ5/view